आर्य समाज गोरखपुर ( बक्शीपुर ) का संक्षिप्त इतिहास-
आर्य समाज गोरखपुर ,बक्शीपुर की स्थापना सन 1897 में हुई थी। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रथम आर्य समाज थी । इसका अत्यंत गौरवमय अतीत रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस आर्य समाज के लोगों का अप्रतिम योगदान रहा। इस आर्य समाज के तत्कालीन प्रधान महाशय जोखन राम आर्य पंo राम प्रसाद बिस्मिल से मिलने के लिए गोरखपुर जेल।में जाया करते थे और जब उन्हें फांसी हुई तो तत्कालीन कलेक्टर से अनुमति ले कर अपनी खद्दर की धोती से कफन ओढ़ाया तथा पुलिस के साथ जा कर वैदिक विधि से उनका अंत्येष्टि संस्कार किया । सन 1930में इस आर्य समाज के सदस्य कृष्ण अवतार लाल मुख्तार ,शिव अवतार लाल मुख्तार तथा जोखन राम आर्य आदि ने डीo एo वीo इंटर कॉलेज की स्थापना किया जिसकी बाद में अनेक शाखाएं जैसे डीo एo वीo पीo जीo कॉलेज,गर्ल्स इंटर कॉलेज, गर्ल्स डिग्री कॉलेज , दयानंद शिशु सदन, डीo एo वीo इंटर कॉलेज खोराबार आदि स्थापित हुईं । सन 1945 में इस आर्य समाज के प्रधान गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार के स्नातक डॉo सूर्य देव प्राचार्य ने चौधरी राम हर्ष चंद रईस, व्यापारी प्रसाद गुप्त आदि नगर के लब्ध प्रतिष्ठ लोगों को इस समाज से जोड़ कर आर्य कन्या पाठशाला की स्थापना किया जो कालांतर में एमo पीo पीo आर्य कन्या इंटर कॉलेज के रूप में जानी जाने लगी। इसी आर्य समाज के द्वारा गुरुकुल गोरखनाथ की भी स्थापना की गई थी। ये सभी शिक्षण संस्थाएं अपने समय की अत्यंत गौरवशाली और महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थाएं थीं। इन सबमें मिला कर 25000 से अधिक छात्र छात्राएं शिक्षा प्राप्त करते थे। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान होने के कारण हजारों छात्र छात्राओं के माध्यम से इस आर्य समाज गोरखपुर ने उनके परिवारों तक पहुंच बना कर वेद और सतत सनातन वैदिक धर्म और संस्कृति का प्रचार और प्रसार कर उन्हें आर्य समाज से जोड़ा । इस प्रकार संपूर्ण नगर में आर्य समाज और वैदिक धर्म की दुंदुभि बजने लगी। आर्य समाज की महिला विंग "महिला आर्य समाज गोरखपुर" की भी स्थापना हो गई। इसकी प्रधान श्रीमती शांति देवी प्राणाचार्य थीं ,उन्होंने श्रीमती सावित्री देवी जी पत्नी तत्कालीन कमिश्नर गोरखपुर,श्रीमती सुशीला बरनवाल, रीता चोपड़ा ,अमृत बाला चोपड़ा, कौशल्या अरोड़ा, आदि अनेक धार्मिक प्रवृत्ति की समाज सेवी महिलाओं का बहुत बड़ा संगठन खड़ा कर महिलाओं में सामाजिक जागृति और नव चेतना का संचार कर उनके अंदर व्याप्त कुरीतियों,अंधविश्वासों,पाखंड को दूर कर वैदिक संस्कारों का संचार किया।फल स्वरूप महिलाओं में जागृति आ जाने से परिवार के परिवार आर्य समाज से जुड़ गए । देहातों और कस्बों तक जा कर महिला आर्य समाज के जत्थे के जत्थे यज्ञ , भजन,प्रवचन के माध्यम से आर्य समाज और वैदिक धर्म का प्रचार प्रसार करने लगे इसी क्रम में महिला आर्य समाज गोरखपुर ने निकटस्थ कस्बे पिपराइच में "आर्य समाज पिपराइच" की स्थापना की।
घुघली शुगर मिल के संस्थापक एवं स्वामी , लाला केशर राम नारंग जी ने इसी आर्य समाज से प्रेरणा ले कर गोरखपुर के घुघली कस्बे में आर्य समाज तथा एक बहुत बड़े विद्यालय डीo एo वीo नारंग इंटर कॉलेज की स्थापना की ।इस प्रकार इसी आर्य समाज से प्रेरित हो कर गोरखपुर जनपद में महाराजगंज , सिसवा , बडहल गंज , देवरिया , मगहर , खलीलाबाद, सहजनवां, आदि अनेकानेक स्थानों पर आर्य समाजों की स्थापना हो गई। गोरखपुर नगर में भी इसी केंद्रीय आर्य समाज से अलग हो कर नगर आर्य समाज साहब गंज लालड़िगी , आर्य समाज मोहद्दीपुर गोरखपुर , आर्य समाज रेलवे कॉलोनी , आर्य समाज असुरन वेद मंदिर ,आर्य समाज गोरखनाथ आदि की भी स्थापना हुई । इस प्रकार आर्य समाज गोरखपुर, बक्शीपुर के ही नेतृत्व में पूरे गोरखपुर,देवरिया,बस्ती ,महाराजगंज , खलीलाबाद आदि निकटस्थ जनपदों में भी आर्य समाज के कार्य का विस्तार हो गया।
इस आर्य समाज गोरखपुर, बक्शीपुर के गरिमामय प्रधानों की एक गौरवशाली श्रृंखला रही है जिनके कुशल नेतृत्व में आर्य समाज गोरखपुर का नगर में एक महत्वपूर्ण स्थान स्थापित हुआ । इन प्रधानों में मुख्य रूप से महाशय जोखन राम आर्य , कन्हैयालाल आर्य ,होती लाल इंजीनियर , डॉo सूर्य देव प्राणाचार्य , पंडित सुरेश चंद्र वेदालंकार, डॉo ओंकार नाथ कविराज , महाशय सूर्यबली प्रसाद , इंजीनियर मोहन लाल अग्रवाल ,अवधेश कुमार राय आदि का नाम विशेष रूपसे उल्लेखनीय हैं। इन सबके प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व से सन 1964 तक आर्य समाज तथा उसकी सहयोगी संस्थाओं और विद्यालयों का स्वर्ण काल रहा ।1964 में आर्य समाज में मुन्ना लाल पत्रकार नामक व्यक्ति का आगमन हुआ यह व्यक्ति एक बहुत बड़ा स्वार्थी तथा उद्दंड , धूर्त एवं डिस्ट्रक्टिव माइंड का व्यक्ति था। इसने आर्य समाज के संगठन में झूठ,दगा,फरेब,अनेक फ्रॉड और जातिवाद का जहर घोल दिया । फल स्वरूप आर्य समाज गोरखपुर में भीषण गुटबाजी , स्वार्थपरता, वैमनस्यता , उद्दंडता और अराजकता का वातावरण व्याप्त हो जाने के कारण संगठन छिन्न भिन्न हो कर नष्ट प्राय हो गया। प्रचार ,प्रसार तथा धार्मिक कार्य अवरुद्ध हो गए ,संपूर्ण संगठन में शिथिलता और सुषुप्तावस्था व्याप्त हो गई। इन विपरीत परिस्थितियों का लाभ उठा कर उक्त मुन्ना लाल पत्रकार ने आर्य कन्या विद्यालय की संचालक संस्था "आर्य शिक्षा सभा गोरखपुर,के पंजीकृत बायलॉज में सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय को अपने षडयंत्र में मिलाकर फ्रॉड और कूट रचना के आधार पर अवैध और अनियमित संशोधन कर विद्यालय को आर्य समाज से अलग कर अपनी व्यक्ति गत संपत्ति बना कर अवैध कब्जा कर लिया। इसी राह पर चल कर इसी मुन्ना लाल और इसके परिवार के पुत्र पौत्रों को अपने षडयंत्र में शामिल कर ठाकुर वीरेंद्र लाल श्रीवास्तव एवं रणवीर शंकर श्रीवास्तव नामक दो वकीलों ने डीo एo वीo ग्रुप ऑफ कॉलेज की संचालक संस्था "द आर्यन एजुकेशनल ट्रस्ट " नामक पंजीकृत संस्था के पंजीकृत बायलॉज में ,आर्य कन्या इंटर कॉलेज की संचालक संस्था "आर्य शिक्षा सभा" के बायलॉज में किए गए फ्रॉड संशोधन की ही तरह फ्रॉड और कूट रचना के आधार पर सहायक रजिस्ट्रार चिट फंड कार्यालय को षडयंत्र में शामिल कर संशोधन कर कब्जा कर उसे अपनी व्यक्ति गत संपत्ति बना कर आर्य समाज से अलगकर लिया। इस प्रकार आर्य समाज गोरखपुर के सब विद्यालय आर्य समाज के हाथ से निकल कर शिक्षा माफियाओं की व्यक्तिगत संपत्ति बन गए । विद्यालयों के आर्य समाज से निकल जाने के कारण आर्य समाज का प्रचार और प्रसार तथा धार्मिक सामाजिक सुधारवादी संगठन का कार्य समाप्तप्राय हो गया। आर्य समाज में भी सुषुप्तावस्था आ गई। इसी कारण तथा प्रति वर्ष निर्वाचन के पश्चात अधिकारी मंडल बदल जाने के कारण विद्यालयों पर अवैध कब्जों का प्रबल विरोध और प्रतिरोध न हो सका।
सन 1980 से आर्य समाज गोरखपुर का अधिकारी मंडल, आर्य प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश लखनऊ, जो कि आर्य समाज का प्रांतीय एवं मातृ संगठन है ,के हस्तक्षेप से परिवर्तित हुआ तथा उसका नेतृत्व डॉo विनय प्राणाचार्य और उनकी कार्य कारणी को अधिकृत किया।तबसे डॉo विनय प्राणाचार्य और उनकी कार्यकारणी समिति ने निरंतर और प्रबल प्रतिरोध इस अवैध और फ्रॉड कब्जों का प्रशासनिक और वैधानिक स्तर पर प्रारंभ किया फल स्वरूप आर्य कन्या विद्यालय से संबंधित संचालक समिति के विवाद में माo उच्च न्यायालय इलाहाबाद उत्तर प्रदेश ने बायलॉज में संशोधन की संपूर्ण प्रक्रिया को अवैध और फ्रॉड घोषित कर निरस्त कर संस्था का मूल पंजीकृत बायलॉज पुनः वैध घोषित कर दिया। इसके विरुद्ध माo सर्वोच्च न्यायालय में अपील हुई वह भी खारिज हो गई ।इसी प्रकार डीo एo वीo ग्रुप ऑफ कॉलेज की संचालक संस्था " द आर्यन एजुकेशनल ट्रस्ट पंजीकृत " पर अवैध कब्जे का वाद न्यायालयों में लंबित है।
विडंबना यह रही कि आर्य कन्या विद्यालय की संचालक संस्था," आर्य शिक्षा सभा पंजीकृत " के विवाद में माo सुप्रीम कोर्ट तक से आर्य समाज की विजय हो जाने के पश्चात हो जाने के पश्चात सहायक रजिस्ट्रार सोसाइटीज द्वारा वैध निर्वाचन करवा कर आर्य शिक्षा सभा की प्रबंध समिति की वैध सूची पंजीकृत कर देने के पश्चात भी गोरखपुर के भ्रष्ट डीoआईo ओo एसo तथा जेo डीo ईo और भ्रष्ट शिक्षा विभाग ने ,सहायक रजिस्ट्रार सोसाइटीज द्वारा पंजीकृत प्रबंध समिति को मान्यता न दे कर एक दुर्दांत शिक्षा माफिया जगदीश पांडे के द्वारा प्रस्तुत नितांत अवैध और फर्जी प्रबंध समिति को मान्य कर कर के उक्त शिक्षा माफिया जगदीश पांडे के पुत्र उत्कर्ष पांडे को आर्य कन्या विद्यालय का प्रबंधक मान्य कर उसका हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिया और अब उसका कार्यकाल समाप्त हो जाने पर भी उसी को प्रबंधक मान कर बिना हस्ताक्षर प्रमाणित किए लगभग एक वर्ष से सारे कार्य संचालित किए जा रहे है ,इन सब भ्रष्टाचार के पीछे बीस से अधिक अवैध नियुक्तियों के द्वारा करोड़ों रूपये की हेरा फेरी का मामला है।
इस प्रकार आर्य समाज और उसके विद्यालयों का बंटाधार हो गया। अब वर्तमान समय में डॉo विनय प्राणाचार्य ,प्रधान ,आर्य समाज गोरखपुर तथा उनकी कार्य कारणी के सहयोगी डॉo कैलाश चंद्र शर्मा , डॉo जेoपीo नारायण , पंडित हरिश्चंद्र त्रिपाठी , निशांत रंजन एडवोकेट , प्रशांत रंजन एडवोकेट आदि निरंतर आर्य समाज के प्रचार ,प्रसार तथा धार्मिक एवं सामाजिक सुधार एवं सेवा कार्यों को गति प्रदान कर रहे है साथ ही विद्यालयों को पुनः आर्य समाज में लाने हेतु प्रशानिक एवं वैधानिक वादों को स्थानीय और माo उच्च न्यायालय में संस्थित कर न्याय पाने को प्रयासरत हैं।
आशा और विश्वास है कि आर्य समाज गोरखपुर दिन प्रतिदिन प्रगति के पथ पर अग्रसर रहते हुए शीघ्रातिशीघ्र पुनः आर्य समाज के 7 विद्यालयों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने में सफल होंगे । ईश्वर हमारे इस पवित्र कार्य में सहायक हो ।
ओ३म शांति शांति शांति
ओ३म स्वस्ति स्वस्ति स्वस्ति.